आज वही है दिन ....जिस दिन
चढ़ गए थे वह .....फांसी पर
एक भरोसा था हम सब पर
कि हम भी कुछ कर जाएंगे
उनकी शहादत से ....सीख कर
हम भारत नया बनाएंगे. .....हम भारत नया बनाएंगे
उनको लड़ना था गोरों से
आजादी हमें दिलानी थी
बेड़ियों में बंधे हुए थे...
मुक्ति हमें दिलाने थी...
करके अपने प्राण न्योछावर
कर्तव्य निभा वे चले गये...
हम पर यह विश्वास था उनका
सीख उन्हें यह देनी थी
देश तो यह तुम्हारा भी है
देश तो यह तुम्हारा भी है
इसको तुम्हें बनाना है
क्यों बैठे हो हाथ बांधकर
इसको तुम्हें बनाना है ,
स्वर्णिम अपने सपनों का भारत
हां .....तुम्हें बनाना है...
तुम से ही उम्मीद है मेरी
क्या तुम मुझे जीताओगे
मुझे यकीन है हां तुम पर
तुम भी कुछ कर जाओगे
हां ...भारत नया बनाओगे
तुम भारत नया बनाओगे...
"जय हिंद जय भारत...


