किसान योग
कौन है योगी असल, क्या योग का अंजाम है ?
मंजिल नहीं अरे योग तो, जीवन सफर का नाम है II
योग का सयोंग बनता, ज्ञान और तप जोड़कर I
योगी नहीं कोई हो सका है, कर्म से मुह मोड़कर II
जी रहा जो, योग को, योगी वही इंसान है ….
योगी जमीं पर है अगर, वो किसान है वो किसान है II
हर सुबह सूरज से पहले, उम्र-भर वह जागता I
कर्म को पूजा समझकर , रात दिन वह भागता II
कितने हठी, कितने व्रती, दुनिया को बस, बहका रहे I
हठ देख इस नादान का , भगवान भी, शरमा रहे II
ऐसे यूं मन को साधना, हरगिज नहीं आसान है....
योगी जमीं पर है अगर, वो किसान है वो किसान है II
साधू तपें घर छोड़ अपन, ये कुटुम्ब संग तप रहा I
ईश्वर समर्पित कर्म करते, सारा जीवन खप रहा II
खुद घूंट पीता जहर के पर ना जरा भी क्रोध है I
कामेश ऐसे आदमी में, देवता का बोध है II
लाखों मुसीबत हों भले, डिगता नहीं ईमान है….
योगी जमीं पर है अगर, वो किसान है वो किसान है II
धरती का सीना चीरकर, वो पसीने से सींचता I
और ज़रूरत आ पड़े त बैल बन हल खींचता II
यूं फसल पाले वो जैसे, परवरिश औलाद की I
हर मांग पूरी कर समय पर, दवा पानी खाद की II
अपने ही दम पर जी रहा, ना चाहता एहसान है …
योगी जमीं पर है अगर, वो किसान है वो किसान है II
खुद उगाई फसल जो, उसे काटकर वो सहेजता I
नीलाम करने को उसे, फिर खुद ही मंडी भेजता II
कोड़ियों के भाव बिकती फसल जो अनमोल है I
ना ज़िक्र लागत का वहा, ना पसीने का मोल है II
राम जाने क्या बचत, क्या फायदा नुकसान है....
योगी जमीं पर है अगर, वो किसान है वो किसान है II
मन में भरा जिसके सदा, सबके लिए सम्मान है I
हर जीव का आदर करे, इसकी यही पहचान है II
जानों इसे तो, ज्ञान पर पड़ा मैल सब धुल जाएगा I
कर्ता, कर्म और कर्म-फल का, भेद सब खुल जाएगा II
जमींदार की तो जीवनी ही, सरल गीता ज्ञान है ...
योगी जमीं पर है अगर, वो किसान है वो किसान है II
करता फिक्र ठंड की नहीं, परवाह नहीं है धूप की I
वह धूल मे ही सना रहे, चिंता नहीं है रूप की II
लड़ता कभी बरसात स, कभी सामना तूफान से I
बस पेट भरने के लिए वह, जूझता भगवान से II
यह जानकर भी है लड़ रह, कि सामने भगवान है …..
योगी जमीं पर है अगर, वो किसान है वो किसान है II
ये बात कहना चाहता हूँ आज मैं सरकार से I
पेट भर सकता नहीं, बारूद और हथियार से II
भले, देश मे इनके लिए, हमदर्दीयों का शौर है I
जाकर जो देखा खेत में, हक़ीक, कुछ और है II
सुधरे सभी के हाल, पर यह आज भी है बेहाल I
यह अन्नदाता आज भी, क्यों कर्ज से बदहाल है II
मत भूलिए, इनके ही दम, जिंदा सभी इंसान है I
योगी जमीं पर है अगर, वो किसान है वो किसान है II


