कौन सा है वो गम

जो छुपाया नहीं।

खोया सब कुछ मगर

कुछ भी पाया नहीें।।


तु दर्द देती रही 

मै हंसता रहा।

तु जख्म देती रही

मै सिलता रहा।

जख्म अपना किसी

को दिखाया नहीे।।

खोया सब कुछ...........


तु सितम ढाती रही

मै सहता रहा।

तु तोड़ती रही

मै पिरोता रहा।

टूटा अन्दर से हूं

पर जताया नहीं

खोया सब कुछ.........


मनोज मिश्रा