वो कान्हा लौट के आओ
तुम्हें मधुबन बुलाता है
वो मोहन लौट के आओ
तुम्हें मधुबन बुलाता है

मटकी फोड़ कर माखन
कन्हैया तुम चुराते थे
खिलाकर ग्वाल बालों को
कन्हैया तुम भी खाते थे
मटकी फोड़ने आओ
तुम्हें मधुबन बुलाता है

वो कान्हा लौट के आओ
तुम्हें गोकुल बुलाता है।

चराते थे जहां गइया
वो वृंदावन भी सूना है
बंशी की मधुर धुन पर
नचाता श्याम सलोना है
चराने गाय आ जाओ
तुम्हें मधुबन बुलाता हैं

वो कान्हा लौट के आओ
तुम्हें गोकुल बुलाता है

बरसाने की हर गोपी
तुम्हारी राह तकती है
निधिवन की हर एक डाली
लिपटकर आज रोती है
रचाने रास आ जाओ
तुम्हें मधुबन बुलाता हैं

वह कान्हा लौट के आओ
तुम्हें गोकुल बुलाता है

कदम के पेड़ में मोहन
तुम्हारी याद बसती है
उसकी डालियां सूखी
तुम्हारी बात करती है
सताने गोपियां आओ
तुम्हें मधुबन बुलाता हैं

वो कान्हा लौट के आओ
तुम्हें गोकुल बुलाता है

मनोज कुमार मिश्र