रात ये लम्बी रात ये काली ये रात बड़ी बलशाली है लेकिन, मन कहता है मत घबरा कुछ क्षण में भोर होने वाली है
कोई न तुझे हिला पायेगा तू रह अडिग वट वृक्ष की तरह भला कोई कितनी काट सकेगा तेरे पास सैकड़ो डाली हैं क्या हुआ जो ये आयाम नया है थोडा सा जो कठिन समय है तू अपना नया आयाम बना ले नभ में जगह बहुत सी खाली है रात ये लम्बी रात ये काली ये रात बड़ी बलशाली है लेकिन, मन कहता है मत घबरा कुछ क्षण में भोर होने वाली है सचिन्द्र कुमार …