रात ये लम्बी रात ये काली ये रात बड़ी बलशाली है
पर मन कहता है मत घबरा कुछ क्षण में ...
भोर जो होने वाली है |
कोई न तुझे हिला पायेगा, तू रह अडिग वट वृक्ष की तरह,
भला कोई कितनी काट सकेगा तेरे पास सैकड़ो डाली हैं|
क्या हुआ जो ये आयाम नया है, थोडा सा जो समय कठिन है
तू अपना आयाम बना ले, नभ में जगह बहुत सी खाली है
रात ये लम्बी रात ये काली ये रात बड़ी बलशाली है
पर मन कहता है मत घबरा कुछ क्षण में ...
भोर जो होने वाली है |
सचिन्द्र कुमार …


