आज तुम बारिश में

कहीं दूर बाहें फैलाये

इक हसीन नज़ारे की तलाश में हो

भूला कर वो सावन की बारिश

जिसमें छतरी तक न खोली थी तुमने

क्योंकि,खुले आसमाँ में

बारिश की बूंदों के साथ

तुम्हें मेरा स्पर्श भी चाहिए था,

आज मेरी साँसें

अंधेरे में घुट रही हैं,

और तेरे चारों तरफ उजाला है!!!