सेहरा मेंफूल तलाशती हैंपत्थर मेंखुदा तलाशती हैंआँखों कीजुर्रत तो देखहर बशर मेंइंसान तलाशती हैं ।मं शर्मा (रज़ा)
सेहरा मेंफूल तलाशती हैंपत्थर मेंखुदा तलाशती हैं
आँखों कीजुर्रत तो देखहर बशर मेंइंसान तलाशती हैं ।
मं शर्मा (रज़ा)