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मन


सत्कर्मों काअमृत पीकरमन योगी हुआ हैतन की अवांछितअपेक्षाओं सेविमुख हुआ है

मानो कोईसिद्धहस्त साधकचिर समाधि मेंलीन हुआ होअद्भुत ऊर्जा का जब सेमन में संचार हुआ है।

मं शर्मा (रज़ा)

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