Article 1 min read 792.6K reads

दस्तक


छन छन कर आती थीचाँदनी खिड़कियों सेठंडी हवा के मदमस्तझोंकों की तरह

बस एक दस्तक हीन हुई दरवाज़े परअफसोस फकतइस बात का रहा ।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more