शून्य
आरंभ शून्य है
अंत शून्य है
यह स्थापित ब्रह्मांड शून्य है।
शून्य पूर्ण है
शून्य संपूर्ण है
श्रृष्टि का आरंभ शून्य है
और अति का अंत शून्य है
ऊर्जा का उद्गम शून्य है
जहां अंत हो वहाँ शून्य है
अज्ञानता का आरंभ शून्य है
अध्यात्म का सार शून्य है
चेतना का प्रारंभ शून्य है
जड़ का भी तो कारण शून्य है
पुण्य कार्य का ध्येय शून्य है
पाप का श्रेय शून्य है
शून्य सगुण है
शून्य निर्गुण है
जो शक्ति का आभास शून्य है
तो मोक्ष का फलरूप शून्य है
शून्य सफल है
शून्य विफल है
शेष और विशेष शून्य है
एक अनंत सत्य शून्य है
शून्य से जन्मे
शून्य में लीन
जड़ चेतन का मूल शून्य है
कारण और निवारण शून्य है
शून्य की आस
शून्य की प्यास
महाकाल का रूप शून्य है
शिव का शून्य ही संपूर्ण है
“मंजूषा”
