जब से तुम मेरे जीवन में आए

जागती रातें, धड़कनें बढ़ाती

वो अनछुई बातें....

शरमाते , घबराते फोन पर बतियाते...

तुम बहुत सी बातें करते हो...

और मैं..

बहुत कुछ कहना चाहती हूँ तुमसे

पर कह नहीं पाती...

बात करते करते बीच में ही चुप हो जाती हूँ

समय के साथ चलते चलते...

एक दूसरे को संभालते हुए

मेरे अधूरे शब्द ...अनकही बातें...

कभी समझ लो तुम शायद...

जैसे मै तुम्हारे करने से पहले ही तुम्हारी

शरारतों को भांप लेती हूँ...

तुम्हारे कहने से पहले ही

तुम्हारे शब्दों को पहचान लेती हूँ ..

हार जीत के मायने खत्म हो गए

जब हारकर भी खुशी मिलने लगे...

अब कभी कभी हारना भी अच्छा लगता है

जब हराने वाले होते हो तुम...

और ये हारना बुरा भी नहीं लगता

क्योंकि तब जीत जाते हो तुम...

मैं समझ नहीं पाती

इतना मुश्किल क्यों हो जाता है...

तुमसे कहना कि, तुमसे इश्क है...