क्रोध की ज्वाला जब फटती हैअपने साथ-साथ कितनों कोअग्नि में हवन करती हैआखिर कब तक दबा रहेगाअंदर में खंजर सा चुभ रहा हैकोई सुनकर भी अनसुना कर रहा है
क्रोध की ज्वाला जब फटती हैअपने साथ-साथ कितनों को
अग्नि में हवन करती हैआखिर कब तक दबा रहेगा
अंदर में खंजर सा चुभ रहा हैकोई सुनकर भी अनसुना कर रहा है