बहुत जज़्ब किए फिसल गए आँसूपलकों की कोरों पर ठहर गए आँसूज़रिया थे ग़म की इबारत लिखने काखुशियों में क्यों ढलक गए आँसू ।मं शर्मा( रज़ा)
बहुत जज़्ब किए फिसल गए आँसूपलकों की कोरों पर ठहर गए आँसूज़रिया थे ग़म की इबारत लिखने काखुशियों में क्यों ढलक गए आँसू ।
मं शर्मा( रज़ा)