Poetry 1 min read 536.5K reads

ज़रिया


बहुत जज़्ब किए फिसल गए आँसूपलकों की कोरों पर ठहर गए आँसूज़रिया थे ग़म की इबारत लिखने काखुशियों में क्यों ढलक गए आँसू ।

मं शर्मा( रज़ा)

Read more Earn more Learn more