सबक सिखलाया था पहलेशायद तू समझा नहींमेरी खामोशी में खनक हैशायद तूने सुना नहींवक्त दोहरा रहा है खुद कोक्यों न फिर यलगार होतेरी कारगुज़ारियों काइस बार पूरा हिसाब हो ।मं शर्मा (रज़ा)
सबक सिखलाया था पहलेशायद तू समझा नहींमेरी खामोशी में खनक हैशायद तूने सुना नहीं
वक्त दोहरा रहा है खुद कोक्यों न फिर यलगार होतेरी कारगुज़ारियों काइस बार पूरा हिसाब हो ।मं शर्मा (रज़ा)