क्या ढूँढता है
किसको पता है
जीवन की चकाचौंध में
किसको दिखा है
असंतोष मन में
घर कर गया है
मन की व्यथा को
कब से ढो रहा है ।
मं शर्मा (रज़ा)


क्या ढूँढता है
किसको पता है
जीवन की चकाचौंध में
किसको दिखा है
असंतोष मन में
घर कर गया है
मन की व्यथा को
कब से ढो रहा है ।
मं शर्मा (रज़ा)