बातों के शब्दजाल मेंअर्थ अनर्थ न हो जाएभावनाओं की अनुभूतिकहीं कलुषित न हो जाएबेचैन ह्रदय की बेचैनीधड़कनों का वेग बढ़ाती जाएसंवेदनाओं की मधुरताकहीं व्याकुलता न बन जाए।मं शर्मा (रज़ा)
बातों के शब्दजाल मेंअर्थ अनर्थ न हो जाएभावनाओं की अनुभूतिकहीं कलुषित न हो जाए
बेचैन ह्रदय की बेचैनीधड़कनों का वेग बढ़ाती जाएसंवेदनाओं की मधुरताकहीं व्याकुलता न बन जाए।
मं शर्मा (रज़ा)