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विवेक


आओ प्रकृति से वफादारी करेंजल और थल से यारी करेंपेड़ पौधों की तरफदारी करेंचलो भविष्य की तैयारी करें

संसाधनों की कमी न होआज बहुत है कल हो न होप्रकृति रोज़ मेहरबान न होथोड़ा तो विवेक से काम लो ।

मं शर्मा( रज़ा)

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