राग द्वेष की मोह मायाअहंकार का घना सायात्याग कुविचारों की छायाअब और न इनका वहन करोसाहस कर विसर्जन करोमन निर्मल स्वच्छंद करो।मं शर्मा (रज़ा)
राग द्वेष की मोह मायाअहंकार का घना सायात्याग कुविचारों की छायाअब और न इनका वहन करोसाहस कर विसर्जन करोमन निर्मल स्वच्छंद करो।
मं शर्मा (रज़ा)