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विरही


प्रेम का माराविरही बेचारादर दर डोलेसब कुछ भूले

जीतने चला थाप्रेम की बाज़ीविवेक का मारासब कुछ हारा

खेल नहीं थातप था पगलेविरह की आग मेंअब थोड़ा तप ले ।

मं शर्मा (रज़ा)

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