कभी सोकर गंवाया
कभी रोकर गंवाया
कभी जीया नहीं
जिसे मुश्किल से पाया
वक्त कीमती था बहुत
क्यों खोकर गंवाया
जब गुज़र गया
तब होश में आया ।
मं शर्मा (रज़ा)
#स्वरचित


कभी सोकर गंवाया
कभी रोकर गंवाया
कभी जीया नहीं
जिसे मुश्किल से पाया
वक्त कीमती था बहुत
क्यों खोकर गंवाया
जब गुज़र गया
तब होश में आया ।
मं शर्मा (रज़ा)
#स्वरचित