जीवन की शाम हैसफर तमाम हैमुझ बिन कैसे रहोगीमन में तूफान हैकिसके शानों परसिर रखोगीकिस तरह मेरीकमी सह लोगीजीवन बड़ाकठोर जुल्मी हैतू इससेवाकिफ नहीं है ।मं शर्मा( रज़ा)
जीवन की शाम हैसफर तमाम हैमुझ बिन कैसे रहोगीमन में तूफान है
किसके शानों परसिर रखोगीकिस तरह मेरीकमी सह लोगी
जीवन बड़ाकठोर जुल्मी हैतू इससेवाकिफ नहीं है ।
मं शर्मा( रज़ा)