किसी ने पाया राज पाटकिसी ने वन की सज़ा पाईवचन निभाना बहुत कठिन हैवचन वही जो खाली न जाईपिता के वचन पुत्र निभाएमर्यादा यही राम ने सिखाईनिभा न सको तो वचन न देनासनातन रीत यही चली आई।मं शर्मा (रज़ा)
किसी ने पाया राज पाटकिसी ने वन की सज़ा पाईवचन निभाना बहुत कठिन हैवचन वही जो खाली न जाई
पिता के वचन पुत्र निभाएमर्यादा यही राम ने सिखाईनिभा न सको तो वचन न देनासनातन रीत यही चली आई।
मं शर्मा (रज़ा)