मन चंचल हैउड़ना चाहताहैनील गगन कोछूना चाहता हैपंख नहींबस हौसले हैंऊँची उड़ानों को लक्ष्य करबुलंद होना चाहता है।मं शर्मा (रज़ा)
मन चंचल हैउड़ना चाहताहैनील गगन कोछूना चाहता है
पंख नहींबस हौसले हैंऊँची उड़ानों को लक्ष्य करबुलंद होना चाहता है।
मं शर्मा (रज़ा)