धन दौलत के ऐशो आरामों में
बेशकीमती उपहार ईनामों में
खुशी ढूँढता फिरे जीवन भर
क्यों मंदिर मस्जिद गुरूद्वारों में
मन के भीतर झाँक कभी तो
आनंद का अथाह खजाना है।
खुशी का नहीं ठिकाना कोई
आज यहाँ कल वहाँ जाना है।
मं शर्मा (रज़ा)


धन दौलत के ऐशो आरामों में
बेशकीमती उपहार ईनामों में
खुशी ढूँढता फिरे जीवन भर
क्यों मंदिर मस्जिद गुरूद्वारों में
मन के भीतर झाँक कभी तो
आनंद का अथाह खजाना है।
खुशी का नहीं ठिकाना कोई
आज यहाँ कल वहाँ जाना है।
मं शर्मा (रज़ा)