Poetry 1 min read 612.3K reads

उमस


तपता सूरजसुलगती धरतीबहती हवा भीभला न करती

सावन बीतामिटी न प्यासबढ़ती उमस नेकिया निराश ।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more