शाखों पर बैठा करते थे कभीआजकल शहरों में आ बसे हैंअपनी कहते अपनी ही सुनतेबे सिर-पैर की हाँका करते हैं।मं शर्मा (रज़ा)
शाखों पर बैठा करते थे कभीआजकल शहरों में आ बसे हैंअपनी कहते अपनी ही सुनतेबे सिर-पैर की हाँका करते हैं।
मं शर्मा (रज़ा)