Poetry 1 min read 616.3K reads

उल्लू


शाखों पर बैठा करते थे कभीआजकल शहरों में आ बसे हैंअपनी कहते अपनी ही सुनतेबे सिर-पैर की हाँका करते हैं।

मं शर्मा (रज़ा)

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