Poetry 1 min read 355.8K reads

उल्लास


मैं बीज हूँ विकास काअभी गर्त में रहने दोधरा चीर के निकलूँगाशक्ति संचित होने दो

गढ़ना है इतिहास नयाप्रण को अंकुरित होने दोउल्लासित हो लेना जीभरवृक्ष तो पहले बनने दो।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more