मैं बीज हूँ विकास काअभी गर्त में रहने दोधरा चीर के निकलूँगाशक्ति संचित होने दोगढ़ना है इतिहास नयाप्रण को अंकुरित होने दोउल्लासित हो लेना जीभरवृक्ष तो पहले बनने दो।मं शर्मा (रज़ा)
मैं बीज हूँ विकास काअभी गर्त में रहने दोधरा चीर के निकलूँगाशक्ति संचित होने दो
गढ़ना है इतिहास नयाप्रण को अंकुरित होने दोउल्लासित हो लेना जीभरवृक्ष तो पहले बनने दो।
मं शर्मा (रज़ा)