Poetry 1 min read 443.9K reads

त्यौहार


खुशी और ग़म काजीत और हार काजीवन एक अवसर हैउत्साह के त्यौहार का

रात और दिन काआज और कल काजीवन एक उत्सव हैजन्म और मरण का।

मं शर्मा (रज़ा)

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