बज्म तुम यूँ गए जैसे आए नहींबादल यूँ गरजे जैसे बरसेंगे नहींबहारें यूँ रूठीं जैसे लौटेंगी नहींबादल भी बरसे बहारें भी आईंएक तुम्हीं गए ऐसे कि आए नहीं।मं शर्मा (रज़ा)
बज्म तुम यूँ गए जैसे आए नहींबादल यूँ गरजे जैसे बरसेंगे नहींबहारें यूँ रूठीं जैसे लौटेंगी नहींबादल भी बरसे बहारें भी आईंएक तुम्हीं गए ऐसे कि आए नहीं।
मं शर्मा (रज़ा)