तुम मिलो तोदीए बुझने न दूँजीवन की बेल कोमुरझाने न दूँतुम मिलो तोघर सँवार लूँअंधेरों से निकलफिर से जीने लगूँतुम मिलो तोनसीब सराह लूँहस्ती पे उसकीयकीन करने लगूँ।मं शर्मा(रज़ा)
तुम मिलो तोदीए बुझने न दूँजीवन की बेल कोमुरझाने न दूँ
तुम मिलो तोघर सँवार लूँअंधेरों से निकलफिर से जीने लगूँ
तुम मिलो तोनसीब सराह लूँहस्ती पे उसकीयकीन करने लगूँ।
मं शर्मा(रज़ा)