मैं भी कतार में था

हाथ क्यों बढ़ाया नहीं

तेरी ही ठोकर में था

तुझको नज़र आया नहीं


मेरी नज़र में तू ही तू

यूँ तो नजरअंदाज़ न कर

सुना है बड़ा रहनुमा है तू

नाम तो खराब न कर ।


मं शर्मा (रज़ा)

#स्वरचित