गुज़र चुका है तूफान

ठहर जाओ

बच रहे हैं सिर्फ निशान

ठहर भी जाओ


वक्त के साथ चलना है

तनिक रूक जाओ

वक्त से बड़ा न कोई बलवान

ज़रा ठहर जाओ।


मं शर्मा (रज़ा)

#स्वतंत्र लेखन