सुख की एक झलक दिखा करक्यों मुझको बर्बाद कियाऐसा स्वाद चढ़ा जुबाँ परकोई दूजा फिर न रंग जंचाफिरता रहा मैं मारा मारागली गली हर गाँव मेंसुख मिला ना मुझको कहींमिला था जो तेरी छाँव में।मं शर्मा (रज़ा)
सुख की एक झलक दिखा करक्यों मुझको बर्बाद कियाऐसा स्वाद चढ़ा जुबाँ परकोई दूजा फिर न रंग जंचा
फिरता रहा मैं मारा मारागली गली हर गाँव मेंसुख मिला ना मुझको कहींमिला था जो तेरी छाँव में।
मं शर्मा (रज़ा)