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तेरा नूर


जब से बसा है नूर तेरा इस नज़र मेंमुझको न कोई और नज़ारा दिखाई देकतरा भी अब मुझको दरिया दिखाई देजिधर भी देखूँ उधर तू ही दिखाई दे ।

मं शर्मा( रज़ा)

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