Poetry 1 min read 1 reads

तट


बहती हुई नदीसमय की गति हैनदी का वितानसंघर्ष का विधान है

दर्शक बने तटकतिपय तटस्थ हैंतटों का मेल बदा नहींउनको कंठस्थ है।

मं शर्मा( रज़ा)

Read more Earn more Learn more