Poetry 1 min read 612.6K reads

तस्कीन


कल आज से बेहतर होगातस्कीन करये आज फिर न आएगायाद रख

आज कल में आधी गुज़रेगीइत्मीनान करदो दिन अभी शेष बची हैयकीन कर ।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more