तन की अपनी मर्यादा हैमन पूर्णतः आजाद हैनियम बंधन तन के हैंमन की उड़ान निर्बाध हैमन को वश में कर केविषय विकार मिटाना हैतन नश्वर है मिट्टी होगामन को ईश्वर से मिलना है ।मं शर्मा (रज़ा)
तन की अपनी मर्यादा हैमन पूर्णतः आजाद हैनियम बंधन तन के हैंमन की उड़ान निर्बाध है
मन को वश में कर केविषय विकार मिटाना हैतन नश्वर है मिट्टी होगामन को ईश्वर से मिलना है ।
मं शर्मा (रज़ा)