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तल्खी


कैसी मुहब्बतकैसा जहांनीयत में दग़ातीखी जुबाँतिरछी नज़रतल्ख बयाँवजूद तेराअंधा कुआँदम घोट रहानफरत का धुआँ।

मं शर्मा( रज़ा)

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