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स्याह


स्याह धवल से बादलों नेआसमान को घेरा हैउमड़ घुमड़ करगरज बरस करधरा से मिलने से रोका है

अपनी मुठ्ठी में भरआसमान कोकब्जे में कर छोड़ा हैदूर दूर से ताका करताबेबस प्रेमी अकेला है ।

मं शर्मा (रज़ा)

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