Poetry 1 min read 614.4K reads

स्वछंदता


प्रेम के भूखे पंछी थेकैद में क्यों रख छोड़े थेखुली हवा में उड़ने देतेप्रेम का पैगाम फैलने देते

खोल दो सारे बंधनों कोस्वच्छंद उड़ानें भरने दोबंधन में दम घुट जाएगाजो तेरा होगा लौट आएगा।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more