प्रेम के भूखे पंछी थेकैद में क्यों रख छोड़े थेखुली हवा में उड़ने देतेप्रेम का पैगाम फैलने देतेखोल दो सारे बंधनों कोस्वच्छंद उड़ानें भरने दोबंधन में दम घुट जाएगाजो तेरा होगा लौट आएगा।मं शर्मा (रज़ा)
प्रेम के भूखे पंछी थेकैद में क्यों रख छोड़े थेखुली हवा में उड़ने देतेप्रेम का पैगाम फैलने देते
खोल दो सारे बंधनों कोस्वच्छंद उड़ानें भरने दोबंधन में दम घुट जाएगाजो तेरा होगा लौट आएगा।
मं शर्मा (रज़ा)