Poetry 1 min read 459K reads

सुविधाएँ


साधन थे येसाध्य नहीं थेबाधक थे येबाध्य नहीं थे

सुविधाओं केलालच मेंक्यों तुम इनकेअधीन हुए

टूट न सकेगाअब ये बंधनयूँ ही जीने कोतुम विवश हुए।

मं शर्मा (रज़ा)

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