पैरहन में हैं सुराख कईपर ज़मीर तो बेपैबंद हैपाँवों में हैं छाले कईहौसले फिर भी बुलंद हैं।मं शर्मा (रज़ा)
पैरहन में हैं सुराख कईपर ज़मीर तो बेपैबंद हैपाँवों में हैं छाले कईहौसले फिर भी बुलंद हैं।
मं शर्मा (रज़ा)