न कोई आया न गया कहींशहर में शोर शराबा भी नहींमौत सा सन्नाटा है हर तरफज़िंदगी इधर से गुज़री ही नहीं।मं शर्मा (रज़ा)
न कोई आया न गया कहींशहर में शोर शराबा भी नहींमौत सा सन्नाटा है हर तरफज़िंदगी इधर से गुज़री ही नहीं।
मं शर्मा (रज़ा)