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सिंदूरी बेला


सुनहरी चादर में भर करनदी में सोना बिखेरा हैइस भोर की सुंदर बेला मेंसूरज ने सिंदूर खेला है

इस सिंदूरी बेला में देखोपंछियों ने रस घोला हैकब तक सोयेगा प्राणीआई जागने की बेला है ।

मं शर्मा (रज़ा)

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