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शिल्पकार


मैं धूल में था पड़ा हुआशिल्पकार के हाथ लगातराश कर हीरा कियामैं क्या था अब क्या हुआ

भूले उस शिल्पी को क्योंजिसने जड़ को चेतन कियाजग में मेरा नाम कियाकोहिनूर सा काम किया।

मं शर्मा (रज़ा)

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