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सिली हवा


इन सिली हवाओं कीठिठुरती सिहरनपरिश्रम के अलावों मेंधूँ धूँ कर जलेगी

जिंदगी की तपिशधड़कनों में है जब तकधुंध की चादरों कोयूँ ही चीरती रहेगी।

मं शर्मा (रज़ा)

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