जो दिल के तार छेड़ दे

वो ही मन का मीत है

अंतर्मन से निकले जो

वो ही कल्पना गीत है


हार कर भी हार न माने

वो ही सच्ची जीत है

सुख में भी वो याद रहा

ये ही सर्वोत्तम सीख है ।



  मं शर्मा (रज़ा)