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शेष


रात सो गईदर्द जगा हैनेपथ्य मेंख्वाब सजा है

कौन परायाकौन सगा हैकौन जानेकिसको पता है

भ्रम में जीनाभ्रम को जीनाजीवन में यहीशेष बचा है।

मं शर्मा( रज़ा)

#स्वरचित

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