शपथ तुम्हें उन कर्मों कीभूले बिसरे संदर्भों कीआशीर्वाद स्वरूप नेहों कीस्नेहिल काँपते हाथों कीभूले से कभी भूल न जानासुध रखना उसके सुमिरन कीकर्त्तव्यविमुख मत हो जानासौगंध तुम्हें उन शपथों की ।मं शर्मा (रज़ा)
शपथ तुम्हें उन कर्मों कीभूले बिसरे संदर्भों कीआशीर्वाद स्वरूप नेहों कीस्नेहिल काँपते हाथों की
भूले से कभी भूल न जानासुध रखना उसके सुमिरन कीकर्त्तव्यविमुख मत हो जानासौगंध तुम्हें उन शपथों की ।
मं शर्मा (रज़ा)